महान समाज सुधारक थे भारतरत्न बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अंबेडकरः पद्मश्री डाॅ. बी.के.एस. संजय

Uttarakhand

देहरादून। तपोवन एन्कलेव अनुसूचित जाति कल्याण समिति के द्वारा डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के 133वां जन्मोत्सव के अवसर पर डाॅ. भीमराव अम्बेडकर पुस्तकालय एवं वाचनालय, दशमेश विहार, आमवाला तरला, देहरादून में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उमेश शर्मा (काऊ) माननीय, विधायक, विशिष्ट अतिथि, डॉ. बैजनाथ, ओ.एन.जी.सी., के. आर. भारती, बी.एस.एन.एल., प्रदीप कुमार, उपायुक्त आबकारी विभाग, रतन लाल, सहायक निदेशक रक्षा मंत्रालय, आरबी सिंह, डील डी.आर.डी.ओ., तपोवन एन्क्लेव अनुसूचित जाति कल्याण समिति के संरक्षक स्वर्ण लाल, अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार गौतम, सचिव भूपाल सिंह, कोषाध्यक्ष संजय कुमार गौतम के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सभी अतिथियों ने डाॅ. अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रृद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पद्म डाॅ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि जो मान सम्मान अपने कर्तव्यों से और बुद्धि से डॉ अंबेडकर ने कमाया और पूरी दुनिया के मानवता के लिए जितना काम किया उन जैसा कोई दूसरा उदाहरण आज भी नहीं मिलता है। आज न केवल हमारे देश में बल्कि पूरी दुनिया भर में विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी सामाजिक एवं अन्य संस्थाओं द्वारा डाॅ. अंबेडकर की मूर्तियां लगाना, उनके नाम पर शैक्षिक संस्थानों, पार्क, शहर, जिले एवं अन्य संस्थानों की स्थापना इत्यादि लगाने की होड़ यह साबित करता है कि डाॅ. अंबेडकर न केवल एक देश, एक वर्ग के राजनेता थे बल्कि वह बहु प्रतिभा के व्यक्तित्तव वाले एक महान समाज सुधारक थे।
पद्म श्री डाॅ. बी. के. एस. संजय मेरा मानना है और मेरा अनुरोध भी है कि हम सब न केवल डाॅ. अंबेडकर की मूर्तियों पर श्रृद्धा सुमन चढ़ाकर उनकी पूजा करें, आर्शीवाद लें बल्कि मेरा मानना है कि हम सबको उनके द्वारा बताए गए रास्ते या सिद्धांतों का अनुसरण करें और यदि हम उनके बताए गए बहुत सी बातों, उपदेशों का अनुसरण नहीं कर सकते हैं तो शिक्षित होने के लिए अपने बच्चों को शिक्षित तो करा ही सकते हैं। गिनीज बुक रिकाॅर्ड होल्डर डाॅ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि मेरा मानना है गरीबी नहीं बल्कि अशिक्षा व्यक्ति के सभी समस्याओं की जड़ है तो शिक्षा ही सभी समस्याओं का हल भी है और यहां पर बैठे सभी लोग इस बात के साक्षी हैं कि यदि हम सब लोग अब थोड़ी देर के अपने गुजरे हुए कल को देखें तो क्या आज हमे नहीं लगता है कि जितना हम सब में बदलाव आया है चाहे वह राजनीतिक हो, सामाजिक हो, आर्थिक, मानसिक या फिर बौद्धिक हो।
पद्म श्री से सम्मानित डाॅ. संजय ने कहा कि परिवर्तन एक सार्वभौमिक नियम है। अंग्रेजी में एक कहावत है ‘नथिंग चेंजिज, इफ नथिंग चेंजिज‘। यह विज्ञान का भी यही सिद्धांत है। परिवर्तन निश्चित है और यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमारे देश में चारों ओर दिखाई दे रहा है। हम सबको पहले बदलाव का विचार लाना होगा और उसके अनुसार काम करना होेगा क्योंकि विचार ही किसी भी काम का प्राथमिक स्रोत है। आज मैं आप सभी से अनुरोध करूंगा कि आप खुद में बदलाव लाने का संकल्प करें। अगर ऐसा होता है तो मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि जब हमारा देश आजादी के 100 साल मना रहा होगा, तब यह एक विकसित देश होगा और विश्वगुरू का दर्जा हासिल कर चुका होगा। मुझे आशा है कि हममें से कुझ लोग इसके साक्षी होंगे।

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