भारत के टेक्सटाइल की नई ग्लोबल पोज़िशनिंग

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(गिरिराज सिंह)

जब हम भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की बात करते हैं, तो हम केवल फैक्ट्री, मशीनों और फैशन की नहीं, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों की बात करते हैं, जिनकी ज़िंदगी कॉटन के खेतों, हैंडलूम, पावरलूम और सिलाई मशीनों से जुड़ी है।
पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जिस व्यापक सोच, दृढ़ संकल्प और निर्णायक नीतिगत सुधार को इस क्षेत्र ने देखा है, उससे आज टेक्सटाइल सेक्टर एक नए आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। आज जब हम टेक्सटाइल सेक्टर में लागू हालिया सुधारों के प्रभाव की बात करते हैं, तो यह केवल बदलाव नहीं, बल्कि किसानों, उद्यमियों, महिलाओं, बुनकरों, तकनीशियनों और युवाओं की नई संभावनाओं की कहानी है जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक टेक्सटाइल शक्ति बनाना है। यह लेख सिर्फ़ योजनाओं की सूची नहीं, बल्कि उस परिवर्तन की झलक है जिसे हम सब ने मिलकर आकार दिया है।

किसान-केंद्रित बदलाव : कॉटन की रिकॉर्ड प्रोक्योरमेंट और MSP में ऐतिहासिक वृद्धि
टेक्सटाइल क्षेत्र की जड़ें खेत में हैं और किसान इस यात्रा की पहली कड़ी हैं। इसलिए हमारी प्राथमिकता हमेशा यह रही कि कॉटन किसान को बाजार के उतार-चढ़ाव, दामों की अनिश्चितता और बिचौलियों की दबाव-प्रणाली से मुक्त किया जाए। यही कारण है कि 2004 से 2014 के बीच जहाँ सरकारी एजेंसियों द्वारा कुल 173 लाख कॉटन बेल्स की खरीद हुई, वहीं 2014 से 2024 के बीच यह बढ़कर 473 लाख कॉटन बेल्स पर पहुँची। यह लगभग 173% की वृद्धि है, जो दर्शाती है कि सरकार ने किसान को सिर्फ़ मौसमी प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि उसे स्थायी सुरक्षा दी।
इसी तरह MSP में सुधार भी किसानों को स्थिरता देने वाला बड़ा कदम रहा है। 2013-14 में कॉटन का MSP 3,700 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि 2025-26 में इसे बढ़ाकर 7,710 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। यह 108% की वृद्धि है, जो किसान की आय, सुरक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत करती है। जब हम कहते हैं कि किसान हमेशा सुरक्षित है, तो यह सिर्फ़ बात भर नहीं, बल्कि इन वास्तविक आँकड़ों पर आधारित सच्चाई है कि सरकार पहले से अधिक मात्रा में कॉटन खरीद रही है और किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कर रही है।
मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी: क्वालिटी, प्रोडक्टिविटी और न्यू ऐज फाइबर
सिर्फ़ ज़्यादा प्रोडक्शन ही काफ़ी नहीं, बेहतर क्वालिटी भी उतनी ही ज़रूरी है। इसी सोच के साथ ₹2,500 करोड़ का मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी शुरू किया गया, जिसका लक्ष्य केवल प्रोडक्शन बढ़ाना नहीं, बल्कि कॉटन की गुणवत्ता को विश्व-स्तर तक पहुँचाना है। इस मिशन के तहत बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती, फार्म मैनेजमेंट और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रियाएँ मजबूत की जा रही हैं। इसके साथ ही किसान को न्यू-एज फाइबर की तरफ प्रेरित करने का प्रयास भी किया जा रहा है ताकि भारत ग्लोबल वैल्यू-चेन में हाई क्वालिटी कॉटन और मिक्स्ड फाइबर के प्रमुख सप्लायर के रूप में उभरे।

जब हम भविष्य की बात करते हैं, तो पुनः स्पष्ट करना आवश्यक है कि टेक्सटाइल की अगली वृद्धि ट्रेडिशनल फाइबर पर ही आधारित नहीं होगी। इसी दिशा में सरकार ने फ्लैक्स, रैमी, सिसल और मिल्कवीड जैसे न्यू ऐज फाइबर को प्राथमिकता में रखा है। यह फाइबर किसानों के लिए कम लागत के साथ अधिक आय देने वाले अनुकूल विकल्प हैं और इनसे पूरी वैल्यू-चेन में नई प्रोसेसिंग, नए उद्योग और बड़े पैमाने पर नए रोज़गार पैदा होंगे। मिल्कवीड जैसे पौधे अब न्यू-एज टेक्सटाइल फाइबर के रूप में उभर रहे हैं और निकट भविष्य में ये किसानों के लिए अतिरिक्त आय का निश्चित ही महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे।

कॉटन पर इम्पोर्ट ड्यूटी में राहत से उद्योग को स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
कॉटन पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने का फैसला उद्योग के लिए तुरंत राहत देने वाला कदम साबित हुआ है। पहले यह राहत 30 सितंबर तक ही दी गई थी, लेकिन इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इसे 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया है। इस कदम से मिल्स को इंटरनेशनल कम्पेटिटिव दामों पर कॉटन मिलने लगा, जिसकी वजह से यार्न और फैब्रिक की प्रोडक्शन कॉस्ट कम हुई जो सीधे तौर पर हमारे टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने वाली साबित होगी।
SMEs के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इम्पोर्ट ड्यूटी में राहत मिलने से अब उन्हें स्थिरता, बेहतर प्लानिंग और कॉस्ट मैनेजमेंट का अवसर मिलेगा। साथ ही, डोमेस्टिक मार्केट में भी रॉ कॉटन की आपूर्ति होगी, जिससे हैंडलूम, पावरलूम, डिजाइनर सेगमेंट, और फैब्रिक आधारित स्टार्टअप तक सभी को हाई क्वालिटी फाइबर उचित मूल्य पर उपलब्ध हो पाएगा। यह निर्णय भारत को एक स्थिर और प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

PLI योजना से टेक्सटाइल सेक्टर की औद्योगिक प्रगति
PLI योजना ने टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊर्जा दी है जिसने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व उत्साह और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार किया है। उद्योग की मांग को देखते हुए आवेदन पोर्टल को 31 दिसंबर 2025 तक पुनः खोला गया है जिसमें अब तक 27 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे नई फैक्ट्रियाँ, नई टेक्नोलॉजी, और हज़ारों नए रोजगार सृजित किए जाएंगे और 2030 तक टेक्सटाइल सेक्टर के 12 बिलियन डॉलर एक्सपोर्ट लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अब तक 74 स्वीकृत कंपनियों में से 42 कंपनियों का टेक्निकल टेक्सटाइल में होना इस बात का संकेत है कि भारत इनोवेशन से भरे इस सेक्टर में गंभीर रूप से निवेश कर रहा है। फलस्वरूप टेक्निकल टेक्सटाइल्स का एक्सपोर्ट भी पिछले वर्ष की तुलना में 12.4 प्रतिशत बढ़कर 3.2–3.4 बिलियन डॉलर तक पहुँचा। सबसे रोचक तथ्य यह है कि शीर्ष 10 कंपनियों द्वारा किया गया वास्तविक निवेश 4,584 करोड़ रुपये रहा, जो कि उनकी कमिटेड राशि से करीब 500 करोड़ रुपये से भी अधिक है।
इसका सबसे प्रेरक उदाहरण बेबी डायपर्स और सैनिटेरी नैप्किंस का है। एक समय था जब भारत इन प्रोडक्टस के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी उत्पादों पर निर्भर था, लेकिन आज PLI के बाद हम इस सेक्टर में इम्पोर्ट डिपेंडेंसी से मुक्त होकर नेट एक्सपोर्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।MEG और विस्कोस पर QCO हटाने से MMF वैल्यू-चेन को राहत
हाल ही में MEG और विस्कोस पर QCO हटाने का निर्णय लिया गया जो इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों और ग्लोबल सप्लाई चेन की परिस्थितियों को समझते हुए लिया गया है। QCO हटने के बाद अब MMF वैल्यू-चेन को वैश्विक स्तर के रॉ मटेरियल कम्पेटिटिव दरों पर मिलेंगे, जिससे प्रोडक्शन प्लानिंग और लागत दोनों में सुधार होगा।
डाउन-स्ट्रीम सेक्टर जिसमें विशेषकर गारमेंटिग सेक्टर को तुरंत राहत मिलेगी। आज इस क्षेत्र में लगभग 1.4 करोड़ नौकरियाँ हैं और हमारा लक्ष्य 2030 तक इसमें 1 करोड़ नई नौकरियों के अवसर तैयार करना है।

Next Gen GST : इनवर्टेड ड्यूटी की समस्या से राहत
टेक्सटाइल इंडस्ट्री की इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के सुधार को लेकर एक पुरानी डिमांड थी जिससे वर्किंग कैपिटल ब्लॉक हो जाता था। पर अब Next Gen GST रिफॉर्म से इस समस्या को दूर किया गया है।
इसके साथ ही रेडीमेड गार्मेंट्स के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ₹2,500 तक के अपेरल पर GST 5% किया गया है। जिससे मिडिल क्लास, युवा व विद्यार्थियों के लिए कपड़े अब और अधिक किफायती होंगे। साथ ही टियर 2-3 शहरों और गांवों में भी इसकी डिमांड भी बढ़ेगी।
लेबर रिफॉर्म से टेक्सटाइल वर्कर्स को सुरक्षा और सम्मान
टेक्सटाइल क्षेत्र में बड़ी संख्या में माइग्रैन्ट, महिला और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स काम करते हैं। हाल के लेबर रिफॉर्म इन्हें वास्तविक अधिकार, सुरक्षा और स्थिरता देने के लिए बनाए गए हैं। सभी अब समान वेतन, समान कल्याण योजनाओं और सुविधाओं के हकदार होंगे। ये सुधार टेक्सटाइल वर्कफोर्स को एक सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
PM MITRA Parks : इंटीग्रेटेड वैल्यू-चेन और 21 लाख रोजगार
PM MITRA योजना भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है। यह पार्क सिर्फ इंडस्ट्रियल क्लस्टर नहीं, मैं इन्हें हमारे टेक्सटाइल सेक्टर के 7 ऊर्जा-केंद्र मानता हूँ। सातों राज्यों में भूमि आवंटन के साथ काम सुचारु रूप से प्रगतिशील है। अभी तक देशभर से लगभग 33,000 करोड़ रुपये की इनवेस्टमेंट आकर्षित किया है। साथ ही इन पार्कों से करीब 21 लाख रोजगार सृजित होंगे।
FTA और नए वैश्विक बाज़ार
जून 2024 में वस्त्र मंत्रालय संभालते वक्त यह साफ़ था कि भारत कुछ चुनिंदा ट्रेडिशनल मार्केट्स पर ही निर्भर है। इसलिए मैंने टीम को निर्देश दिया कि दुनिया के नए इमर्जिंग मार्केट्स को पहचानें, उनके डिमांड ट्रेंड्स और पर-कैपिटा इंकम का अध्ययन करें। इसके बाद 40 ऐसे नए बाज़ार पहचाने गए जहाँ भारत की मौजूदगी बहुत कम थी, लेकिन संभावना बहुत ज्यादा है।
इसी सोच के साथ आज भारत 27 देशों के साथ FTA के जरिए नए बाज़ारों में मज़बूती से प्रवेश कर चुका है। हाल में UK के साथ हुआ CETA समझौता इसका बड़ा उदाहरण है। इसका असर तुरंत दिखा और अप्रैल 2024 से 2025 के बीच UK को हमारे एक्सपोर्ट में 15 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसी तरह India–EFTA Agreement हमारे लिए लगभग 14 बिलियन डॉलर के प्रीमियम मार्केट का द्वार खोलता है।
सिर्फ़ एक साल में भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 111 देशों में बढ़े, जिसमें 38 देशों में 50% से ज़्यादा और 16 देशों में 25–50% की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे प्रेरक कहानी अर्जेंटीना की रही जो कभी भारत के लिए एक चैलेंजिंग मार्केट था, आज वहीं हमारे एक्सपोर्ट में 73% की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
यह सभी प्रयास मिलकर यही दिखाते हैं कि भारत का टेक्सटाइल सेक्टर अब सिर्फ़ उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि देश की ताकत और आगे बढ़ने की क्षमता का बड़ा आधार बन चुका है। आज हमारा टेक्सटाइल सेक्टर नए विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, और आने वाले सालों में भारत दुनिया की प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे खड़े होने की क्षमता रखता है। हमारा लक्ष्य साफ़ है भारत को ऐसा टेक्सटाइल हब बनाना जो भरोसेमंद, आधुनिक और आने वाले समय की जरूरतों के हिसाब से सस्टेनेबल भी हो।

(लेखक केंद्रीय वस्त्र मंत्री हैं।)

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