कीवी उत्पादन से बदल सकती है राज्य के किसानों की तकदीर

Uttarakhand

देहरादून। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में फल उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। फल उत्पादन के क्षेत्र में यह राज्य खासा तरक्की कर सकता है और समृद्ध बन सकता है।
इस दिशा में राज्य में कुछ पहल हुई भी हैं, लेकिन जितना कार्य होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। यहां की जलवायु रसीले फलों के लिए काफी अनुकूल है। पहाड़ों के ठंडे मौसम में किसान विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन कर अपना आजीविका चलाते हैं। पिछले कुछ समय से राज्य के कुछ इलाकों में कीवी की पैदावार देखने को मिल रही है और किसान अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं, लेकिन कीवी उत्पादन का काम सीमित क्षेत्र में ही हो रहा है। कीवी उत्पादन को राज्य में बड़े स्तर पर किए जाने  की जरूरत है।
न्यूजीलैंड का कीवी फल उत्तराखंड के किसानों की किस्मत बदलने में मददगार साबित हो सकता है। पर्वतीय जनपदों में कीवी उत्पादन के लिए उपयुक्त जलवायु है। कीवी की फसल के लिए अच्छी बात यह है कि जंगली-जानवर भी इसको नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। वहीं, जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां भी यह फल आसानी हो जाता है, बस इसके लिए सटीक जानकारी और लगाने का तरीका आना चाहिए। कीवी उत्पादन का किसानों व बागवानों को प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। कीवी के फल में ऑक्सीडेंट की मात्रा भरपूर होती है जो शरीर को कई बीमारियों से दूर रखता है, इस कारण बाजार में इसकी डिमांड रहती है और कीमत ज्यादा मिलती है।
राज्य में कीवी बागवानी की सफलता को देखते हुए कई बागवानों ने बागवानी बोर्ड व उद्यान विभाग की सहायता से कई नए कीवी बागों का निर्माण किया। कीवी का फल देखने में चीकू की तरह का लगता है। कीवी बाहर से भूरे रंग का होता है। जब इसे काटा जाता है तो यह अंदर से हरे रंग का होता है। कीवी के पेड़ों की लंबाई लगभग 9 मीटर तक होती है। अंगूर की बेलों की तरह ही इसकी बेलें बढ़ती हैं। किवी फल पर्णपाती पौधा है हमारे राज्य में यह मध्यवर्ती क्षेत्रों में 600 से 1500 मीटर की उँचाई तक सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। क्‍योंकि इन क्षेत्रों की जलवायु व परिस्थितियां इसके अत्याधिक अनुरूप हैं। कीवी फल में नर व मादा दो प्रकार की किस्में होती हंै। इसमें ज्यादातर एलीसन, मुतवा और तमूरी नर किस्में बाग मे लगाई जाती है। एवोट, एलीसन ब्रूनों, हैवर्ड और मोन्टी मुख्य मादा किस्में है। एलीसन व मोन्टी जिसकी मिठास सबसे अधिक होती है। कीवी दो प्रकार की होती है-ग्रीन कीवी और गोल्ड कीवी। ग्रीन कीवी अंदर से हरे रंग का होता है जिसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत ही कम पाई जाती है जबकि गोल्ड कीवी अंदर से गहरे पीले रंग का होता है। यह ग्रीन कीवी से बहुत ज्यादा स्वस्थ और रसीली होती है। कीवी का फल भूरे रंग का, लम्बूतरा, मुर्गी के अण्डे के आकार का होता है,छिलके पर बारीक रोयें होते हैं, जो कि फल पकने पर रगड़ कर उतारे जा सकते हैं। कीवी रेशेदार व फल गूदा हल्के हरे रंग का होता है व इसमें काले रंग के छोटे-छोटे बीज होते हैं। फल पकने के बाद छिलके को उतारकर सारा फल (बीजों सहित) खाया जाता है। यदि फल अधिक पककर गल जाए तो इसे छेद करके आम की तरह चूस कर भी खाया जा सकता है। इसके अलावा कीवी फल से जैम, स्क्वेश, आसव तथा सुखाकर पापड़ और कैण्डी के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है। कीवी में इतनी शक्ति है की यह बीपी, कोलेस्ट्रोल, चिकनगुनिया, डेंगू, त्वचा, अनिंद्र, पाचन तंत्र, इम्युनिटी सिस्टम, रक्त, गर्भावस्था, श्वसन, दर्द, ह्रदय, डायबिटीज, वजन आदि को स्वस्थ और संतुलित रखने के गुण पाए जाते हैं। कीवी फल के 100 ग्राम खाने योग्य भाग में क्रमशः ठोस पदार्थ 15.20 प्रतिशत, अम्ल 1-1.6 प्रतिशत, शर्करा 7.5-13.0 प्रतिशत, प्रोटीन 0.11-1.2 प्रतिशत, तथा रेशा 1.1-2.9 प्रतिशत मिलता है। इसके अलावा कैल्शियम 16-51 मिग्रा., क्लोराइड 39-65 मिग्रा., मैग्नीशियम 10-32 मिग्रा., नाइट्रोजन 93-163 मिग्रा., फास्फोरस 22-67 मिग्रा., पोटैशियम 185-576 मिग्रा., सोडियम 2.8-4.7 मिग्रा0, सल्फर 25 मिग्रा. तथा विटामिन-ए 175 आई यू., पॉलीसेकेराइड, कैरोटीनोड, फ्लेवोनोइड, सेरोटोनिन, विटामिन बी-6, विटामिन बी-12, लोहा(.2 मिलीग्राम), तांबा, विटामिन के (1ः), विटामिन-सी 80-120 मि.ग्रा. तथा विटामिन-बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन ई, विटामिन के और प्रचुर मात्रा में पोटैशियम, फोलेट पाये जाते हैं। किवी फल में अधिक मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने तथा शरीर को विभिन्न बीमारियों से बचाने में मददगार होता है। विटामिन-सी तो नींबू प्रजाति के फलों की अपेक्षा तीन से चार गुना अधिक होता है। उत्तराखंड में पलायन रोकने व रोजगार की प्रबल संभावना को देखते हुए कीवी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस समय किवी फल तैयार होता है, उन दिनांे बाजार में ताजे फलों के अभाव होता है। इस कारण कास्तकार द्वारा काफी आर्थिक लाभ उठाया जा सकता है। इसे कोर्ड स्टोर में भी चार महीने तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है। फलों को दूर भेजने में भी कोई हानि नहीं होती, क्योंकि वह अधिक टिकाऊ है कमरे के तापमान पर इसे एक माह तक रखा जा सकता है इन्हीं कारणों से बाजार में इसको लम्बे समय तक बेच कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है। विदेशी पर्यटकों में यह फल अधिक लोकप्रिय होने के कारण दिल्ली व अन्य बड़े शहरों मे इसे आसानी से अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है। राज्य के आम जन में कीवी फल की स्वीकार्यता अभी तक पूर्णतः नहीं बन सकी है जिस कारण स्थानीय बाजार में यह फल कम ही बिक पाता है बाहर भेजने के लिए इतना उत्पादन नहीं हो पाता कि बाहरी मार्केट तक इसे भेजा जाए।

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